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विकास के दावों की खुली पोल! बीमार महिला को प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठाकर 7 KM पैदल ले गए ग्रामीण, सड़क के इंतजार में नकोड़ा-कपोला गांव

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नौगव(उत्तरकाशी)। उत्तराखंड में विकास के दावों के बीच यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के नौगांव ब्लॉक स्थित नकोड़ा-कपोला गांव से आई तस्वीरें सरकारी व्यवस्थाओं और ग्रामीण सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। गांव में सड़क नहीं होने के कारण एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को रात के अंधेरे में प्लास्टिक की कुर्सी का सहारा लेना पड़ा। महिला को कुर्सी में बैठाकर डंडों के सहारे करीब सात किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया गया।

जानकारी के अनुसार, रात करीब 10 बजे बलबीर सिंह की पुत्री मीना देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिवार और ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें अस्पताल पहुंचाने की थी। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने प्लास्टिक की कुर्सी में डंडे लगाकर अस्थायी पालकी तैयार की और रात में दुर्गम रास्ते से सात किलोमीटर पैदल चलकर उन्हें सड़क तक पहुंचाया, जहां से अस्पताल ले जाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। गांव में हर एक-दो महीने में ऐसी आपात स्थिति पैदा होती है और मरीजों को इसी तरह कंधों पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कई बार जनप्रतिनिधियों और सरकार के सामने सड़क की मांग उठाई गई, यहां तक कि चुनाव बहिष्कार भी किया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय निवासी महावीर पंवार माही ने कहा कि चुनाव के दौरान नेता गांव पहुंचकर विकास के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद ग्रामीणों की पीड़ा भुला दी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि विकसित भारत और उत्तराखंड के दशक की बातों के बीच ग्रामीणों को मरीज कुर्सी पर ढोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया जाए। ऐसा नहीं होने पर ग्रामीण जुलूस निकालकर उग्र आंदोलन और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। महावीर पंवार ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित जनप्रतिनिधियों और सरकार की होगी।

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Author: ziddikalam

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