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त्योहार आते ही क्यों जागता है खाद्य सुरक्षा विभाग? दीपावली पर 15 प्रतिष्ठानों की जांच, 4 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए सालभर बाजारों में बिकती हैं मिलावटी खाद्य सामग्री, लेकिन त्योहारों पर ही क्यों याद आते हैं नियम-कायदे? प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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जिद्दी कलम
उत्तरकाशी, 04 नवंबर।
त्योहारों का मौसम आते ही खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता अचानक बढ़ जाती है। बाजारों में छापेमारी शुरू हो जाती है, दुकानों के निरीक्षण होने लगते हैं और मिलावट के संदेह में खाद्य पदार्थों के नमूने भी एकत्र किए जाने लगते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार प्रशासन को आम जनता की सेहत की चिंता सिर्फ त्योहारों के सीजन में ही क्यों होती है? क्या मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी केवल दीपावली, होली और अन्य त्योहारों के दौरान ही होती है?

दीपावली के मद्देनजर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार को जिला मुख्यालय के प्रमुख बाजारों में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान कुल 15 व्यापारिक प्रतिष्ठानों की जांच की गई और संदिग्ध खाद्य पदार्थों के चार नमूने संग्रहित किए गए। इनमें तेल के दो, गुड़ का एक और मिठाई का एक नमूना शामिल है। सभी नमूनों को जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान बाजार क्षेत्र के रेस्टोरेंट और भोजनालय भी विभाग की जांच के दायरे में आए। यहां साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं मिलने पर संचालकों को कड़ी चेतावनी दी गई। वहीं खुले में बाहर टंगे चिकन को मौके पर ही नष्ट कराया गया। मिठाई विक्रेताओं को भी निर्देश दिए गए कि दुकानों में बिक्री के लिए रखी मिठाइयों की ट्रे पर निर्माण तिथि और उपभोग की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से अंकित की जाए।

विभाग की इस कार्रवाई से एक बार फिर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि बाजारों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, रेस्टोरेंटों की साफ-सफाई और खुले में खाद्य सामग्री बेचने पर निगरानी रखी जाती है तो यह व्यवस्था पूरे साल क्यों प्रभावी नहीं दिखाई देती? क्या विभाग के पास नियमित निरीक्षण का कोई ठोस कैलेंडर है? क्या त्योहारों के बाद भी इसी तरह औचक जांच और सैंपलिंग जारी रहती है?

आम उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य केवल त्योहारों के दौरान ही जोखिम में नहीं रहता। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला तेल, गुड़, मसाले, दूध और मिठाइयां भी गुणवत्ता की कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए। ऐसे में जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल त्योहारों तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित और जवाबदेह निगरानी व्यवस्था के रूप में सामने आए।

जिलाधिकारी के निर्देश पर चलाए गए अभियान में सहायक आयुक्त खाद्य संरक्षा अश्वनी कुमार सिंह सहित विभागीय टीम मौजूद रही। जिला प्रशासन ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि दीपावली के बाद भी विभाग की यह सक्रियता बरकरार रहती है या फिर त्योहार समाप्त होते ही बाजारों की निगरानी भी ठंडे बस्ते में चली जाती है।

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Author: ziddikalam

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