उत्तरकाशी जिले में मौसम ने करवट बदल ली है। करवा चौथ के दिन विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम में बर्फबारी शुरू हो गई, जबकि निचले इलाकों में रात से ही बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम में आए इस बदलाव ने करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। करवा चौथ के अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन और पूजा-अर्चना कर व्रत का पारण करती हैं।
परंपरा के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण किया जाता है। लगातार हो रहीं बारिश के कारण चंद्रदर्शन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि देर रात तक आसमान साफ नहीं हुआ और चंद्रमा दिखाई नहीं दिया, तो व्रत का पारण किस प्रकार किया जाएगा। मौसम की अनिश्चितता के बीच इस विषय को लेकर महिलाओं में चर्चा बनी हुई है।
इस संबंध में पंडित रघुवीर प्रसाद ने बताया कि व्रत से जुड़े निर्णय देशकाल और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीका अनुसार चंद्रमा के उदय के समय तथा ग्रह-नक्षत्रों की गणना को ध्यान में रखते हुए व्रत की पूजा और पारण के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।
फिलहाल, उत्तरकाशी में मौसम के बदले मिजाज के बीच करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। गंगोत्री धाम में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश के चलते महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि मौसम साफ होने के साथ चंद्रमा के दर्शन हो पाते हैं या नहीं।




