जिद्दी कलम
उत्तरकाशी।
जनपद उत्तरकाशी के मुखबा गांव की बेटी श्रुति सेमवाल ने वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) की ओर से आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (यूएसएसटीसी-2026) में उन्हें प्रतिष्ठित ‘यंग वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन में श्रुति की उपलब्धि ने क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
श्रुति सेमवाल वर्तमान में वन्यजीव जीवविज्ञान, हिमालयी पारिस्थितिकी, पक्षी विज्ञान और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में शोध कर रही हैं। वह डीएसटी-इंस्पायर फेलो हैं और उनका शोध हिमालय की समृद्ध प्राकृतिक संपदा, पक्षियों के जीवन तथा वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है।
श्रुति का प्रमुख शोध हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले कोकलास फीजेंट पक्षी पर केंद्रित है। इसके तहत वह पक्षी के प्राकृतिक आवास, प्रजनन पारिस्थितिकी, व्यवहार और ध्वनि संचार का अध्ययन कर रही हैं। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में क्षेत्रीय अध्ययन के माध्यम से वह पक्षियों की उपस्थिति, उनके रहन-सहन और प्राकृतिक वातावरण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का संकलन कर रही हैं।
उनके शोध में बायोअकॉस्टिक्स यानी जीवों की ध्वनियों के वैज्ञानिक विश्लेषण की भी अहम भूमिका है। इस तकनीक के माध्यम से पक्षियों की आवाजों का अध्ययन कर उनकी उपस्थिति और व्यवहार से संबंधित जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। उनका यह शोध भविष्य में पक्षियों की निगरानी, प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की योजनाओं को वैज्ञानिक आधार देने में उपयोगी साबित हो सकता है।
यंग वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड मिलना श्रुति सेमवाल की शोध यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से मुखबा गांव सहित पूरे उत्तरकाशी जनपद में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि ने यह साबित किया है कि पहाड़ की बेटियां भी विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के दम पर नई पहचान बना सकती हैं।
श्रुति की सफलता से उन युवतियों को भी प्रेरणा मिलेगी, जो उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि श्रुति भविष्य में भी अपने शोध के माध्यम से हिमालयी जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।






