Home » उत्तराखंड » बेडथात( इंद्रकील पर्वत) में धनारी पट्टी और गमरी पट्टी के लोगों द्वार धूमधाम से मनाया गया दुधगाडू का मेला। बेडथात में प्रतिवर्ष भाद्रपद (भादो) संक्रांति को दूध और दही से होता है नागराज देवता का अभिषेक

बेडथात( इंद्रकील पर्वत) में धनारी पट्टी और गमरी पट्टी के लोगों द्वार धूमधाम से मनाया गया दुधगाडू का मेला। बेडथात में प्रतिवर्ष भाद्रपद (भादो) संक्रांति को दूध और दही से होता है नागराज देवता का अभिषेक

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चैन सिंह असवाल सम्पादक
जिद्दी कलम
उत्तरकाशी
उत्तरकाशी विकासखंड डुंडा के धनारी पट्टी और विकासखंड चिन्यालीसौड़ के गमरी पट्टी के लोगो द्वारा बेडथात (इंद्र कपर्व) में नागराज के मंदिर में दुधगाडू मेले का आयोजन किया गया इसमें क्षेत्र के हजारों लोगों ने नागराज देवता से अपने परिवार की कुशलता की प्रार्थना की।
धनारी पट्टी के ग्राम पंचायत पटूडी,ढुंगलधार बगयाल गांव ,थाती ईड आदि और गमरी पट्टी के उलण गांव ,जयपुर महरगांव,चमियारी आदि के लोग हजारों के संख्या में पहुंचकर अपने आराध्य देवता नागराज के प्रति के कई किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़कर अपने श्रद्धा भाव के साथ पहुंचे ।
यहां पर सैकड़ो लीटर दूध और दही के साथ नागराजा देवता का अभिषेक करते हुए अपने परिवार क्षेत्र वासियों तथा देशवासियों की कुशलता की कामना की गई।

उत्तराखंड की लोक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागराज देवता (विशेषकर सेम मुखेम नागराज) के द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के समय उत्तराखंड आने का प्रसंग मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग का उद्धार करने के बाद, नागराज ने उत्तराखंड के इस क्षेत्र को अपना धाम बनाया और सेम मुखेम जाते वक्त नागराजा ने इसी मार्ग का चयन किया था और इसी जगह पर नागराजा ने विश्राम किया जिस आधार पर इस जगह का नाम बेडथात के नाम से जाना जता है।
इस पौराणिक दूधगांडू मेले में धनारी पट्टी और गमरी पट्टी के आम जनमानस को पूजा करने और दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ।

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Author: ziddikalam

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