चैन सिंह असवाल( सम्पादक)
जिद्दी कलम
उत्तरकाशी
भगवान आशुतोष की नगरी उत्तरकाशी जहां कभी साधना, संस्कार और गंगा की धारा पहचान थी वही आज चारों तरफ देश के भविष्य कहे जाने वाले नव युवक पीढ़ी नशे के बारूद पर आकर खड़ी हो गई है जनपद के भद्रजन नेतागण व बड़े बड़े कथा वाचक अपनी- अपनी भाषा शैली में नशे के ख़िलाफ़ खूब प्रवचन करते है लेकिन धरातल पर उनकी भागीदारी शून्य दिखाई देती है। आज सरकारी वाहन और निजी वाहन जो कई वर्षों से खराब होने के कारण कई जगहो पर खडे पड़े है जिसकी आड में नव युवक का भविष्य अंधकारमय हो रहा है ऐसी गाड़ियों के अंधेरे में नशे की गिरफ्त में पहुंचती युवा पीढ़ी पूरे समाज के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है।
आज जगह जगह खड़ी पुरानी गाड़ियां नशे का अड्डा बनते जा रही हैं। नशे के विरुद्ध अभियान की सबसे बड़ी चुनौती केवल नशा करने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं, बल्कि उन स्थानों की पहचान भी है जहां नशे की गतिविधियां छिपकर चल सकती हैं। उत्तरकाशी नगर में लंबे समय से खड़े पुराने और अनुपयोगी वाहनों को लेकर भी चिंता सामने आ रही है। विशेष रूप से जोशियाड़ा में जेवीएन पार्किंग क्षेत्र में वर्षों से खड़ी कुछ सरकारी एवं अन्य गाड़ियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि ये वाहन वास्तव में अनुपयोगी हैं और लंबे समय से खड़े हैं तो संबंधित विभागों को उनकी स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। जो वाहन नियमों के अनुसार नीलामी योग्य हैं, उनकी नियमानुसार नीलामी या हटाने की कार्यवाहो क्यों नही। क्योंकि सवाल केवल लोहे के कबाड़ का नहीं है। सवाल यह है कि कहीं यही बंद वाहन बच्चों के लिए नशे की छिपी हुई पाठशाला तो नहीं बन रहे? यदि किसी स्थान पर युवा चोरी-छिपे नशा करने के लिए पहुंच रहे हैं तो वहां नियमित पुलिस गश्त, आकस्मिक जांच और निगरानी की आवश्यकता है। नगरपालिका, जिला अस्पताल और अन्य विभागों के लंबे समय से खड़े वाहनों की भी स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए।
