रविवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने आपदा प्रबंधन से जुड़े रेखीय विभाग के साथ बैठक कर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी के बाद ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए गए ट्रैकर्स एवं पोर्टरों की सुरक्षा को लेकर जरूरी निर्देश दिये है। ट्रैकर्स और पोर्टर्स को सुरक्षित स्थानों पर लाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और मुस्तैद है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में विभिन्न ट्रेकिंग रूटों और बेस कैंपों में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।
मौसम की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने हेली सेवाओं को पूरी तरह अलर्ट रहने एवं सोमवार को हेली रैकी और आवश्यकता पड़ने पर हवाई रेस्क्यू शुरू करने के निर्देश दिए हैं। ट्रैकर्स के लिए राशन, पैक्ड फूड और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था रखने के साथ स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। चिकित्सकों की टीमें, जरूरी दवाइयां और एंबुलेंस को समीपवर्ती स्थानों पर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी ट्रैकर को तत्काल उपचार मिल सके।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, एनआईएम और वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड़ में काम कर रही हैं। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से सैटेलाइट संचार के माध्यम से एक्सपीडिशन गाइडों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और ट्रैकिंग रूटों पर मौजूद लोगों की स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुल 136 पर्वतारोही, ट्रैकर एवं सहयोगी स्टाफ मौजूद हैं। जिसमें से हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन के अंतर्गत कुल 89 तथा हाई अल्टीट्यूड ट्रैकिंग श्रेणी में कालिंदी पास बेस कैंप पर 18 और ऑडिन कोल पास बेस कैंप में 29 सदस्य शामिल हैं। जिला प्रशासन की प्राथमिकता उच्च हिमालय में मौजूद सभी ट्रैकर्स और पोर्टरों को सुरक्षित नीचे लाना है।
बेहतर समन्वय और मौके पर व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र हर्षिल के लिए रवाना हो गई हैं। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित टीमों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।





