जिद्दी कलम
चैन सिंह असवाल( सम्पादक)
उत्तरकाशी
उत्तराखंड सरकार के द्वारा चलाये जा रहे जन-जन की सरकार जन- जन के द्वार कार्यक्रम में जनपद के निकम्मे और आलसी अधिकारियों की पोल खुले मंच पर खूब खुल रही है कभी जनप्रतिनिधियों का गुस्सा तो कभी जनता का आक्रोश का सामना करना पड रहा है।
न्याय पंचायत पिपली धनारी में “जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार” आयोजित शिविर में यह बात खूब देखने को मिली हैं। ग्राम पंचायत डांडा माजफ के जनप्रतिनिधियों तथा जनता ने अधिकारियों के निकम्मेपन की व्याख्या करते हुये अपनी नाराजगी व्यक्त की जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी भी है। जनप्रतिनिधियों के द्वारा पूछे गये सवालों पर विधायक जी को भी खूब मिर्ची लगी जिसका परिणाम यह हुआ कि गंगोत्री विधायक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुये कहा कि आयोजित शिविर में दर्ज शिकायतों पर ठोस कार्यवाही नही हुई तो उक्त संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी लेकिन सच्चाई धरातल पर क्या होगी यह तो समय ही बतायेग।
पिपली राजकीय इण्टर कॉलेज आयोजित शिविर में अधिकांश शिकायत विजली विभाग,लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की देखी गई ।
उपरोक्त विभागों के अधिकारियों के द्वारा शिकायत कर्ताओं को हमेशा के तरह आश्वासन का झुनझुना पकड़ाया गया यह बात हम इस आधार पर कह रहे है कि जिस काम के लिये लोग कई महिनों से विभागों तथा अधिकारियों के चक्कर काट रहा है तो वही का इस तरह के आयोजित शिविरों में सम्बंधित विभाग का अधिकारी 10 से 15 दिन मे काम करने की बात कैसे कह रहे है अखिरकार कौन सी जादू की छडी है जो इस तरह के शिविरों अधिकारियों को एक्टिव मोड़ मेंला देती है इससे स्पष्ट होता है कि जनपद का अधिकारी जनता के प्रति कितना संवेदनशील होता है
न्याय पंचायत पिपली में “जन जन की सरकार जन-जन के द्वार” आयोजित शिविर में एक सेवानिवृत्त सैनिक प्रेम सिंह बिष्ट का अजीबो गरीब मामला सामने आया जिसमें शिकायत कर्ता ने अवगत करवाते कहा कि पंजाब नेशनल बैंक पिपली से उनके बैंक खाते से 2004 से 2025 तक बारह लाख रुपये(120000) की धनराशि किसी के द्वारा निकाली गयी है जिसकी शिकायत उन्होंने बैंक अधिकारियों तथा जनपद के आला अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस में शिकायत भी करवा चुके है लेकिन आज तक उनको हर जगह से आश्वासन के अलावा कुछ नही हासिल हुआ इससे साफ नजर आता है कि सरकार जनता के प्रति कितनी जबाव देही है कब तक जनता के मेहनत की कमाई को यूँही लौटाती रहेगी कब जनपद के अधिकारी जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।